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रिधोरा-घोगरा में ऑरेंज फेस्टिवल: तकनीकी कृषि प्रबंधन से किसानों को मिला संतरा उत्पादन बढ़ाने का मार्गदर्शन

प्रख्यात कृषि प्रबोधक प्रवीण बेलखड़े ने दी वैज्ञानिक जानकारी

रिधोरा-घोगरा में ऑरेंज फेस्टिवल: तकनीकी कृषि प्रबंधन से किसानों को मिला संतरा उत्पादन बढ़ाने का मार्गदर्शन

संवाददाता धनंजय जोशी
जिला पांढुरना मध्य प्रदेश
पांढुरना – जिले के ग्राम रिधोरा, घोगरा में आयोजित ऑरेंज फेस्टिवल के अंतर्गत आज 17 फरवरी (मंगलवार) दोपहर 3 बजे कृषि प्रबोधन एवं सांस्कृतिक संध्या कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर संतरा उत्पादक किसानों के लिए तकनीकी कृषि प्रबंधन विषय पर विशेष मार्गदर्शन सत्र रखा गया, जिसमें जिलेभर से बड़ी संख्या में किसान, व्यापारी एवं कृषि क्षेत्र से जुड़े लोग उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में विशेष कृषि प्रबोधक श्री प्रवीण बेलखड़े जी द्वारा संतरा फसल के आधुनिक एवं वैज्ञानिक प्रबंधन पर विस्तार से जानकारी दी गई। उन्होंने किसानों को फसल की गुणवत्ता बढ़ाने, उत्पादन में वृद्धि करने और बाजार में बेहतर मूल्य प्राप्त करने के लिए आवश्यक तकनीकी उपायों पर मार्गदर्शन किया।

*संतरा उत्पादन बढ़ाने के लिए बताए महत्वपूर्ण उपाय*
कृषि प्रबोधक श्री बेलखड़े जी ने बताया कि संतरा फसल की पैदावार बढ़ाने के लिए किसानों को कुछ प्रमुख बिंदुओं पर विशेष ध्यान देना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि—
संतरा बागान में समय-समय पर मिट्टी परीक्षण कराकर पोषक तत्वों की कमी को पूरा करना चाहिए।
फसल को मजबूत बनाने के लिए संतुलित उर्वरक प्रबंधन अपनाना जरूरी है।
गर्मी के मौसम में ड्रिप सिंचाई जैसी आधुनिक तकनीक अपनाकर पानी की बचत के साथ उत्पादन बढ़ाया जा सकता है।
पौधों में फूल व फल की संख्या बढ़ाने के लिए समुचित कटाई-छंटाई (प्रूनिंग) करना लाभकारी रहता है।
संतरा फसल को नुकसान पहुंचाने वाले कीट-रोगों से बचाव हेतु समय पर जैविक व वैज्ञानिक दवाओं का छिड़काव आवश्यक है।
फलों की गुणवत्ता सुधारने के लिए ग्रेडिंग, पैकिंग और पोस्ट हार्वेस्ट मैनेजमेंट पर ध्यान देना चाहिए।
उन्होंने बताया कि यदि किसान इन तकनीकी उपायों को नियमित रूप से अपनाएं तो संतरा फसल की पैदावार के साथ-साथ गुणवत्ता भी बेहतर होगी, जिससे बाजार में संतरे को अधिक दाम मिल सकते हैं।

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*सन ड्राय तकनीक पर किसानों को मिला विशेष प्रशिक्षण*
कार्यक्रम में श्री अजय चौरे जी ने किसानों को संबोधित करते हुए संतरा व्यापार एवं संरक्षण की महत्वपूर्ण तकनीक “सन ड्राय” पर विस्तृत जानकारी दी।
उन्होंने यह भी बताया कि उचित सन ड्राय और भंडारण की तकनीक अपनाकर किसान अपने उत्पाद को लंबे समय तक सुरक्षित रख सकते हैं, जिससे बाजार में मांग के अनुसार बिक्री कर बेहतर मूल्य प्राप्त किया जा सकता है।

*कृषि तकनीक और बाजार ज्ञान का संगम*
ऑरेंज फेस्टिवल के इस सत्र में किसानों को तकनीकी खेती के साथ-साथ विपणन रणनीति की भी जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने किसानों को बताया कि यदि संतरा उत्पादन के साथ संग्रहण, ग्रेडिंग, पैकिंग और मार्केटिंग पर ध्यान दिया जाए तो किसान अपनी आय में कई गुना वृद्धि कर सकते हैं।

*उपस्थित प्रमुख लोग*
कार्यक्रम में श्री गुर्वे पत्रकार जी, श्री बिरे जी, श्री युवराज कामड़े जी, श्री सतीश बोडखे जी, श्री विक्की कालबाडे जी, श्री मोंटी ठाकुर जी, श्री राधेश्याम डंगड़ा जी, श्री विलास राउत जी, श्री माहेश्वरी जी, श्री वसंतराव फोले जी, श्री दीपक कामड़े जी, श्री राजकुमार कालबंडे जी, श्री हिम्मत सिंह बिसेस जी, श्री यमड़े जी, श्री अनिल वनकर जी, श्री बंसीगे जी, श्री नंदू बावरे, श्री चंद्रशेखर अमाड़कर, श्री नरेंद्र फोले जी, श्री चांडक जी, श्री बलवंत फोले जी, श्री गायकवाड़ सर, श्री अशोक भूसारी जी, श्री नीलेश गाडगे जी, पुरुषोत्तम जूनघरे जी, श्री शेखर बोड़े, श्री कैलाश ठाकरे, श्री बंडू बेंडे जी, श्री दिनेश लाड़से, रोशन गावंडे, श्री होमेश्वर मोहोड़ जी, श्री गजानन कोचे, श्री नीलेश वानखड़े जी सहित बड़ी संख्या में किसान एवं व्यापारी मौजूद रहे।

*तकनीकी  एवं वैज्ञानिक कृषि की दिशा में महत्वपूर्ण पहल*
ऑरेंज फेस्टिवल का यह कार्यक्रम जिले के किसानों के लिए तकनीकी खेती और उन्नत प्रबंधन सीखने का एक महत्वपूर्ण मंच साबित हुआ। किसानों ने विशेषज्ञों द्वारा दी गई जानकारी को उपयोगी बताते हुए कहा कि इससे उन्हें संतरा उत्पादन और व्यापार दोनों में फायदा मिलेगा।
ऑरेंज फेस्टिवल का उद्देश्य किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों से जोड़कर उन्हें आत्मनिर्भर और आर्थिक रूप से मजबूत बनाना है।

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